गुलज़ार साहब की शायरी दिल को छू लेने वाली होती है। ज़िंदगी पर गुलज़ार की शायरी इतनी सादगी से गहरे जज़्बात बयां करती है कि हर शख्स खुद को उससे जोड़ पाता है। चाहे खुशी हो या ग़म, उम्मीद हो या तन्हाई, life gulzar shayari हर पल को खूबसूरती से बयान करती है। उनके अल्फ़ाज़ ज़िंदगी के हर रंग को छूते हैं।
गुलज़ार शायरी ऑन लाइफ इन हिंदी एक ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहां शब्दों के ज़रिए दिल की बात कही जाती है। उनकी ये मशहूर पंक्तियाँ – “ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा, क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा” – इस बात की मिसाल हैं कि कैसे वह चंद लफ़्ज़ों में एक गहरी बात कह जाते हैं। जब भी दिल उदास हो या सोच में डूबा हो, shayari gulzar on life एक सुकून देती है।
लोग अक्सर गुलज़ार की बेस्ट शायरी ऑन लाइफ ढूंढते हैं ताकि उन्हें ज़िंदगी के किसी मोड़ पर कुछ राहत मिले। गुलज़ार साहब की शायरी ऑन लाइफ में एक सच्चाई छुपी होती है, जो न सिर्फ़ दिल को छूती है बल्कि सोचने पर मजबूर भी कर देती है। उनके जज़्बात इतने सच्चे होते हैं कि हर कोई कहता है – “बस यही तो मैं कहना चाहता था।”
अगर आप भी shayari of gulzar on life की तलाश में हैं, तो यकीन मानिए, उनके अल्फ़ाज़ आपको अपनी ज़िंदगी का कोई न कोई पहलू ज़रूर याद दिला देंगे। बेस्ट गुलज़ार शायरी ऑन लाइफ हमें बताती है कि ज़िंदगी सिर्फ़ मंज़िल नहीं, एक खूबसूरत सफ़र है, जिसे महसूस करना ज़रूरी है।
बचपन में भरी दोपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला,
जब से डिग्रियाँ समझ में आयी पाँव जलने लगे हैं!!
मोहब्बत और मौत की पसंद तो देखो,
एक को दिल चाहिए और दूसरे को धड़कन!!
हर चीज़ बदलती हुई अच्छी लगती हैं,
लेकिन दोस्त पुराने ही अच्छे लगते हैं!!
जब मिला शिकवा अपनों से तो ख़ामोशी ही भली,
अब हर बात पर जंग हो यह जरूरी तो नहीं!!
मंज़िल भी उसकी थी रास्ता भी उसका था,
एक हम अकेले थे काफिला भी उसका था!!
तुम्हारा क्या तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी।
मगर हम ख़ांकसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है!!
लोग कहते है की खुश रहो,
मगर मजाल है की रहने दे!!
अपने साये से चौंक जाते हैं,
उम्र गुजरी है इस क़दर तन्हा!!
गुलाम थे तो, हम सब हिंदुस्तानी थे,
आज़ादी ने हमें, हिन्दू मुसलमान बना दिया!!
वह जो सूरत पर सबकी हँसते है,
उनको तोहफे में एक आईना दीजिए!!
खुद की कीमत गिर जाती है,
किसी को कीमती बनाने की चाह में!!
“बदल दिए हैं अब हमने नाराज़ होने के तरीक़े,
रूठने के बजाय बस हल्के से मुस्कुरा देते हैं!!”
“कौन कहता है, हम झूठ नहीं बोलते,
एक बार ख़ैरियत, पूछ कर तो देखो!!”
“एक ना एक दिन हासिल कर ही लूंगा मंज़िल..
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा कर मर जाऊंगा!!”
“सलीका अदब का तो बरक़रार रखिए जनाब,
रंजिशें अपनी जगह हैं सलाम अपनी जगह!!”
“इतनी सी ज़िंदगी है पर ख्वाब बहुत हैं,
जुर्म तो पता नहीं साहब पर इल्ज़ाम बहुत हैं!!”
“जो चाहे हो जाए वह दर्द कैसा,
और जो दर्द को महसूस ना कर सके वो हमदर्द कैसा!!”
“उसने एक ही बार कहा दोस्त हूं.
फिर मैंने कभी नहीं कहा व्यस्त हूं!!”
“रोई है किसी छत पे, अकेले ही में घुटकर,
उतरी जो लबों पर तो वो नमकीन थी बारिश!!”
“उम्र जाया कर दी लोगो ने,
औरों में नुक्स निकालते निकालते,
इतना खुद को तराशा होता,
तो फ़रिश्ते बन जाते!!”
“मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,
हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है!!”
“वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर,
आदत इस की भी आदमी सी है!!”
“उसने कागज़ की कई कश्तियां पानी उतारी और,
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे!!”
“एक ही ख्वाब ने सारी रात जगाया है,
मैंने हर करवट सोने की कोशिश की!!”
“कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था,
आज की दास्ताँ हमारी है!!”
“एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा,
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जुनून होगा!!”
“ज़रा ये धूप ढल जाए, तो हाल पूछेंगे,
यहाँ कुछ साये, खुद को खुदा बताते हैं!!”
“सहमा-सहमा डरा सा रहता है,
जाने क्यों जी भरा सा रहता है!!”
“खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो?
एक खामोश-सा जवाब तो है!!”
“तेरे बगैर किसी और को देखा नहीं मैंने,
सूख गया वो तेरा गुलाब लेकिन फेंका नहीं मैंने!!”
“मुझे खौफ कहां मौत का,
मैं तो ज़िंदगी से डर गया हूं!!”
“बदल जाओ वक़्त के साथ या वक़्त बदलना सीखो,
मजबूरियों को मत कोसो, हर हाल में चलना सीखो!!”
“सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम,
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं!!”
“ज़मीं सा दूसरा कोई सखी कहां होगा,
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है!!”
“सहर न आई कई बार नींद से जागे,
थी रात, रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले!!”
“कोई न कोई रहबर रास्ता काट गया,
जब भी अपनी राह चलने की कोशिश की!!”
“कहीं अटका हुआ है पल शायद,
वक़्त में पड़ गया है बल शायद!!”
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